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सृष्टि के रचयिता कौन है?

आज हम आपको बताएंगे की सृष्टि के रचयिता कौन है. सभी धर्मों के सदग्रंथों से प्रमाणित  करके।


वेदों के अनुसार सृष्टि रचयिता

1- ऋग्वेद मण्डल नं 9 सूक्त 54 मंत्र 3 में लिखा है कि सूर्य के समान यानि जैसे सूर्य ऊपर विद्यमान है ऐसे पवित्र शीतल अमर परमेश्वर कबीर विश्व के सर्व लोकों के ऊपर के लोक में बैठा है, जो सर्व सृष्टि का रचनहार है।
2-ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 90 मंत्र 3
इस मंत्र में बताया गया है कि वह पूर्ण ब्रह्म कविर्देव तो परब्रह्म से भी बड़ा है अर्थात् सर्वशक्तिमान है तथा सर्व ब्रह्मण्ड उसी के अंश मात्र पर ठहरे हैं।
3- संख्या नंबर 920, सामवेद के उतार्चिक अध्याय 5, खंड 4, श्लोक 2
सर्व सृष्टि रचनहार, अविनाशी परमात्मा भक्त के पाप कर्मों को नष्ट करके पवित्र करने वाला स्वयं कबीर देव है।
4- अथर्ववेद काण्ड नंबर 4 अनुवाद नं. 1 मंत्र 7
  में कबीर परमात्मा द्वारा की गई सृष्टि रचना का प्रमाण है:-
   भक्तों का वास्तविक साथी, विधिवत साधक को सतलोक ले जाने वाला, सर्व ब्रह्मांड की रचना करने वाला, काल की तरह धोखा न देने वाले आप कविर्देव हैं।


 कुरान के अनुसार सृष्टि के रचयिता
🌏कुरान के अनुसार कबीर परमात्मा ने ही सारी सृष्टि रची
हजरत मुहम्मद को कुरान शरीफ बोलने वाला प्रभु (अल्लाह) कह रहा है कि वह अल्लाहु अकबर कबीर वही है जिसने जमीन तथा आसमान के बीच में जो कुछ भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन ऊपर अपने सत्यलोक में तख्त पर विराजमान हो(बैठ) गया। क़ुरान सूरह अल-फुरकान 25 आयत 59


 बाइबल के अनुसार सृष्टि रचयिता
1- पवित्र बाइबल में उत्पत्ति ग्रंथ में पृष्ठ नं 2 अध्याय 1:20 व 2:5 में परमेश्वर ने कहा कि हम मनुष्य को अपने स्वरुप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं। तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरुप के अनुसार उत्पन्न किया नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टि की।
2- बाईबल उत्पत्ति ग्रंथ 1:26 - 2:3 में प्रमाण है कि कबीर परमेश्वर ने 6 दिन में सर्व सृष्टि रचकर सातवें दिन विश्राम किया तथा मनुष्यों की उत्पत्ति अपने स्वरुप के अनुसार की।


श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अनुसार सृष्टि के रचयिता

1- श्री गुरु ग्रंथ साहिब पृष्ठ 839, महला 1, राग राग बिलावलु, अंश 1 में श्री नानक जी ने अपनी अमर वाणी में कहा है कि परमात्मा ने स्वयं ही अपने हाथों से सर्व सृष्टि की रचना की है।
आपे सचु कीआ कर जोड़ि। अंडज फोड़ि जोडि विछोड़।।
धरती आकाश कीए बैसण कउ थाउ। राति दिनंतु कीए भउ-भाउ।।
2- श्री गुरु ग्रन्थ साहेब, पृष्ठ नं. 721, महला 1, राग तिलंग
आदरणीय नानक साहेब जी की वाणी में लिखा है कि :-
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कून करतार। हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।।

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