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कलयुग में कबीर परमेश्वर किस किसको मिले है।

आज हम आपको बताएंगे की कबीर परमेश्वर कलयुग में किस किस को मिले. सभी सदग्रंथों से प्रमाणित होता है कि सभी धर्मों में एक ही परमेश्वर का वर्णन किया गया है ।

🌺संत गरीबदास जी
परमेश्वर कबीर साहेब जी संत गरीबदास जी को 1727 में सतलोक से आकर मिले थे
अपना तत्वज्ञान कराया, नाम‌ दिया तथा सतलोक दर्शन करवाया।
गरीबदास जी ने वाणी में कहा है- हम सुल्तानी नानक तारे, दादू को उपदेश दिया।
जात जुलाहा भेद न पाया, काशी माहे कबीर हुआ।।



🌺 अब्राहिम अधम सुल्तान जी
कबीर परमेश्वर जी अब्राहिम अधम सुल्तान जी को मिले और सार शब्द का उपदेश कराया। 
कबीर सागर के अध्याय " सुल्तान बोध" में पृष्ठ 62 पर प्रमाण है:- 
प्रथम पान प्रवाना लेई। पीछे सार शब्द तोई देई।।
तब सतगुरु ने अलख लखाया। करी परतीत परम पद पाया।।
सहज चौका कर दीन्हा पाना(नाम)। काल का बंधन तोड़ बगाना।।

🔅हनुमान जी 
हनुमान जी को भी मिले थे कबीर परमात्मा
कबीर सागर के "हनुमान बोध" में परमेश्वर कबीर साहेब द्वारा हनुमान जी को शरण में लेने का विवरण है।
परमेश्वर कबीर जी ने हनुमान जी को शरण में लेकर उनमें सत्य भक्ति बीज डाला ।



🔅विभीषण और मंदोदरी को मिले थे परमात्मा

"कबीर सागर" में प्रमाण है कि त्रेतायुग में कबीर परमेश्वर जी मुनींद्र ऋषि के रूप में आए थे। विभीषण और मंदोदरी को शरण में लेकर उन्हें नाम उपदेश देकर सत्य भक्ति प्रदान की। पूरी लंका नगरी में केवल वे दोनों ही भक्ति भाव तथा साधु विचार वाले थे। जिस कारण उनका अंत नहीं हुआ।।

🔅गुरु नानक जी
नानक जी को कबीर साहेब जिंदा महात्मा के वेश में आकर मिले थे।
उन्हें सचखंड यानी सत्यलोक के दर्शन कराए थे उन्होंने कबीर साहेब की महिमा गाते हुए कहा है 
गुरु ग्रन्थ साहिब
राग ‘‘सिरी‘‘ महला 1 पृष्ठ नं. 24 पर शब्द नं. 29
फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस।।
खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।।

🔅रामानंद जी
रामानंद जी को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब मिले। 
रामानंद जी को 104 वर्ष की आयु में सत्य ज्ञान समझाकर तथा सतलोक दिखाया। 
दोहूं ठौर है एक तू, भया एक से दोय। गरीबदास हम कारणैं उतरे हैं मघ जोय। बोलत रामानंद जी, सुन कबीर करतार। गरीबदास सब रूप में, तू ही बोलनहार।।


🔅नल व नील
त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र नाम से प्रकट हुए तथा नल व नील को शरण में लिया।
उनकी कृपा से ही समुद्र पर पत्थर तैरे।
धर्मदास जी की वाणी में इसका प्रमाण है,
रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार।
जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर शिला तिराने वाले।
धन्य-धन्य सत कबीर भक्त की पीड़ मिटाने वाले।


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1 Comments

  1. बहुत ही जबरदस्त ब्लाग लिखा है इससे पता चलता है कि कबीर परमेश्वर किस किस को मिले हैं ।

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