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राधा स्वामी पंथ की सच्चाई

Radhasoami panth Exposed⚡

कबीर, झूठे गुरुवा बात बिगाड़ी, काल जाल नहीं जान्या!
राधस्वामी पंथ के प्रवर्तक शिवदयाल जी का कोई गुरु नहीं था, वे निगुरे थे। बिना गुरु उन्होंने शास्त्रविरूद्ध भक्ति साधना की तथा राधास्वामी पंथ की स्थापना करके कोरा शास्त्रविरूद्ध अज्ञान जनता में प्रचारित किया। बिना गुरु धारण किए शास्त्रविरूद्ध भक्ति करने के कारण शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत भूत योनि को प्राप्त हुए और अपनी प्रिय शिष्या बुक्की में प्रेतवश प्रवेश करके पहले की तरह ही हुक्का और चूरमा खाने पीने लगे।
शिवदयाल जी जीवित अवस्था में हुक्का पिया करते थे उनकी जीवनी में लिखा है जबकि कबीर साहेब की वाणी है... "अमल आहारी आत्मा कबहुं न उतरे पार"
उपरोक्त प्रमाण राधास्वामी पुस्तकों (संतमत प्रकाश, सारवचन वार्तिक, जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज) में वर्णित है।

नकली गुरुओं की पहचान होती है वह शास्त्र विरुद्ध साधना करते और करवाते है। जिस कारण वे स्वयं भी भूत योनि को प्राप्त होते है और अनुयायियों को भी नरक व चौरासी का भागी बनाते है। यही दशा राधास्वामी प्रमुख शिवदयाल जी की हुई।
परमेश्वर कबीर साहिब की वाणी है।
"सतगुरु पुरुष कबीर है, चारों युग प्रवाण।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।"

परमेश्वर कबीर साहिब की वाणी में प्रमाण है कि बिना सतगुरु के भक्ति करने पर अनमोल मानव जीवन बर्बाद होता है और चौरासी का भागी बनता है। शिवदयाल जी ने भी कोई गुरु धारण नहीं किया था।
गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान।
गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, चाहे पूछो वेद पुराण।।
गुरु बिन काहु न पाया ज्ञाना, ज्यो थोथा भुस छडे किसाना।
गुरु बिन मिले मोहे ना पावै, जन्म जन्म बहु धक्के खावै।
गुरु बिन प्रेत जन्म सब पावै, वर्ष सहस्र गर्भ सो रहावै।

पूर्ण संत की सत्संग सुनने के लिए अवश्य देखें प्रतिदिन-
साधना चैनल 7:30pm से
ईश्वर टीवी 8:30pm से

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3 Comments

  1. Kisi aur santmat ki burai karna kisi sacche satguru ka parichay nahin hota itne sacche Hain to dusron ki burai kyon karte hain Kabir Das ji ka avtar kahane Wale Rampal Ji yah bataiye Kabir Ji ne kiski urai ki unhone kabhi kisi ki burai nahin ki unhone khud Ko hi Bura bataya hai

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  2. Kripya mujhe yah bataen kya aapke Guru jail mein kyon hai

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  3. Wintech aap logon Ko bhram itna Karen aur unke HAL per chhod do Sahi Gyan nahin de sakte to galat bhi mat do aap ki dukandari band karo sacche sant ko karva rupaye ki property ki jarurat nahin Hoti

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