आध्यात्मिक ज्ञान से उपचार संभव
यह काल का लोक है यहां प्रत्येक जीव अपने कर्मों अनुसार फल भोगता है। हम शरीर में जो आहार डालते हैं उसे पचने में 48 घंटे का समय लगता है तब तक शरीर संचित ऊर्जा का प्रयोग करता है अन्य उदाहरण के लिए ऊंट (जानवर) आज खाए भोजन से उत्पन्न ऊर्जा को अपने कुबड़ में संचित कर लेता है और कई दिन तक रेगिस्तान की भीषण गर्मी में बिना जल और भोजन के रह लेता है क्योंकि परमात्मा ने उसे ऐसा शरीर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा से कई दिन तक अपनी भूख प्यास मिटा सकता है। परंतु संचित ऊर्जा खत्म होते ही उसे भूख मिटाने के लिए भोजन चाहिए।
इसी तरह जब तक मनुष्य के पुण्य कर्म उसके साथ चलते हैं तब तक ज़िंदगी की सारी मौज मस्ती व्यक्ति लूटता है और पुण्य खत्म होते ही दुखों की मार पड़ने पर व्यक्ति टूट जाता है। दुखों की चोट किसी भी रूप में लग सकती है। चाहे बीमारी कारण बने या कोई दुर्घटना और अन्य भौतिक दुख। सच तो यह है कि यह काल इक्कीस ब्रह्माण्ड का राजा हमें सुखी नहीं रख सकता। हमारे दुख इसके सुख का कारण हैं। (काल के असली रूप और परमात्मा से सुख प्राप्त करनेे के लिए अवश्य पढ़ें पुस्तक ज्ञान गंगा और फ्री पुस्तक प्राप्त करने के लिए मैसेज भेजें 7496801825 पर)।
इस लोक में भी सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ज्ञान केवल पूर्ण ब्रह्म परमात्मा ही दे सकते हैं। उनके लिए कैंसर , एड्स, टीबी, पोलियो, कोढ़, गठिया, काली खांसी, चर्मरोग जैसे लाइलाज रोग ठीक करना पलक झपकाने जैसा है।
पूर्ण परमात्मा सर्वशक्तिमान है जो अंधे को आंख देत, कोढिन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया। इनके दरबार से कोई खाली नहीं जाता। यह वो परमात्मा है जो सबकी झोली मनचाही खुशियों से भर देता है। कबीर परमात्माा जब छः सौ वर्ष पहले काशी में आए थे तो उन्होंने सिंकदर लोधी जो दिल्ली का महाराजा था। अपने आशीर्वाद मात्र से उसका जलन का रोग ठीक कर दिया था। जो उसके पीर शेख तकी और अन्य फकीर, तांत्रिक और वैद्यों से भी ठीक नहीं हुआ था।
परमात्मा प्रत्येक युग में स्वयं या फिर अपने कृपा पात्र संत रूप में अपने निजधाम सतलोक से चलकर पृथ्वी पर आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं। परमात्मा अपने साधक की आयु भी बढ़ा सकता है और लाइलाज बीमारी भी ठीक कर देता है – ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 मंत्र 26.
संत रामपाल जी परमात्मा के कृपा पात्र और पूर्ण परोपकारी संत हैं जिनकी शरण में आने से लोग कैंसर जैसी भंयकर बीमारी से बिना कोई महंगी दवाई खाए, बिना कीमौथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यून थेरैपी कराए केवल आशीर्वाद मात्र से बिल्कुल ठीक हो चुके हैं। वह लोग जिनके पास डाक्टर की फीस भरने के भी पैसे नहीं थे केवल संत रामपाल जी से नाम दीक्षा लेकर और उनके द्वारा बताई भक्ति को पूर्ण विश्वास के साथ करने लगे और आज वह बिल्कुल स्वस्थ हैं।
वह संत नहीं जो चमत्कार दिखाए
और वह भी संत नहीं जिससे चमत्कार न हों।
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा दिए जा रहे आध्यात्मिक ज्ञान को समझ कर जिसने भी संत जी से नाम दीक्षा ग्रहण की वो आज तन मन और धन तीनों से सुखी और स्वस्थ हैं। परमेश्वर से दूरी और उसके ज्ञान से अनभिज्ञता मनुष्य के दुखों का कारण होता है परंतु अब विश्व विकास, समृद्धि, स्वास्थ्य के लिए संत रामपाल जी महाराज की शरण ग्रहण कर रोग मुक्त होकर सतभक्ति आरंभ करेगा
यह काल का लोक है यहां प्रत्येक जीव अपने कर्मों अनुसार फल भोगता है। हम शरीर में जो आहार डालते हैं उसे पचने में 48 घंटे का समय लगता है तब तक शरीर संचित ऊर्जा का प्रयोग करता है अन्य उदाहरण के लिए ऊंट (जानवर) आज खाए भोजन से उत्पन्न ऊर्जा को अपने कुबड़ में संचित कर लेता है और कई दिन तक रेगिस्तान की भीषण गर्मी में बिना जल और भोजन के रह लेता है क्योंकि परमात्मा ने उसे ऐसा शरीर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा से कई दिन तक अपनी भूख प्यास मिटा सकता है। परंतु संचित ऊर्जा खत्म होते ही उसे भूख मिटाने के लिए भोजन चाहिए।
इसी तरह जब तक मनुष्य के पुण्य कर्म उसके साथ चलते हैं तब तक ज़िंदगी की सारी मौज मस्ती व्यक्ति लूटता है और पुण्य खत्म होते ही दुखों की मार पड़ने पर व्यक्ति टूट जाता है। दुखों की चोट किसी भी रूप में लग सकती है। चाहे बीमारी कारण बने या कोई दुर्घटना और अन्य भौतिक दुख। सच तो यह है कि यह काल इक्कीस ब्रह्माण्ड का राजा हमें सुखी नहीं रख सकता। हमारे दुख इसके सुख का कारण हैं। (काल के असली रूप और परमात्मा से सुख प्राप्त करनेे के लिए अवश्य पढ़ें पुस्तक ज्ञान गंगा और फ्री पुस्तक प्राप्त करने के लिए मैसेज भेजें 7496801825 पर)।
इस लोक में भी सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ज्ञान केवल पूर्ण ब्रह्म परमात्मा ही दे सकते हैं। उनके लिए कैंसर , एड्स, टीबी, पोलियो, कोढ़, गठिया, काली खांसी, चर्मरोग जैसे लाइलाज रोग ठीक करना पलक झपकाने जैसा है।
पूर्ण परमात्मा सर्वशक्तिमान है जो अंधे को आंख देत, कोढिन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया। इनके दरबार से कोई खाली नहीं जाता। यह वो परमात्मा है जो सबकी झोली मनचाही खुशियों से भर देता है। कबीर परमात्माा जब छः सौ वर्ष पहले काशी में आए थे तो उन्होंने सिंकदर लोधी जो दिल्ली का महाराजा था। अपने आशीर्वाद मात्र से उसका जलन का रोग ठीक कर दिया था। जो उसके पीर शेख तकी और अन्य फकीर, तांत्रिक और वैद्यों से भी ठीक नहीं हुआ था।
परमात्मा प्रत्येक युग में स्वयं या फिर अपने कृपा पात्र संत रूप में अपने निजधाम सतलोक से चलकर पृथ्वी पर आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं। परमात्मा अपने साधक की आयु भी बढ़ा सकता है और लाइलाज बीमारी भी ठीक कर देता है – ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 मंत्र 26.
संत रामपाल जी परमात्मा के कृपा पात्र और पूर्ण परोपकारी संत हैं जिनकी शरण में आने से लोग कैंसर जैसी भंयकर बीमारी से बिना कोई महंगी दवाई खाए, बिना कीमौथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यून थेरैपी कराए केवल आशीर्वाद मात्र से बिल्कुल ठीक हो चुके हैं। वह लोग जिनके पास डाक्टर की फीस भरने के भी पैसे नहीं थे केवल संत रामपाल जी से नाम दीक्षा लेकर और उनके द्वारा बताई भक्ति को पूर्ण विश्वास के साथ करने लगे और आज वह बिल्कुल स्वस्थ हैं।
वह संत नहीं जो चमत्कार दिखाए
और वह भी संत नहीं जिससे चमत्कार न हों।
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा दिए जा रहे आध्यात्मिक ज्ञान को समझ कर जिसने भी संत जी से नाम दीक्षा ग्रहण की वो आज तन मन और धन तीनों से सुखी और स्वस्थ हैं। परमेश्वर से दूरी और उसके ज्ञान से अनभिज्ञता मनुष्य के दुखों का कारण होता है परंतु अब विश्व विकास, समृद्धि, स्वास्थ्य के लिए संत रामपाल जी महाराज की शरण ग्रहण कर रोग मुक्त होकर सतभक्ति आरंभ करेगा

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